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Friday, February 17, 2012
राजिम कुंभ 2012
तीसरा पर्व स्नान, हजारों ने त्रिवेणी मे डुबकी लगा पुण्य लाभ कमाया
राजिम कुंभ 2012 ग्यारहवाँ दिन लोकमंच और जगराता के नाम
रायपुर 17-2-2012। राजिम कुंभ 2012 के तीसरे पर्व स्नान विजया एकादशी मे हजारों लोगों ने अल सुबह त्रिवेणी संगम मे डुबकी लगाकर पुण्य लाभ कमाया। साधु संतो ने सबसे पहले ब्रह्म मुहर्त मे स्नान किया। मुख्य मंच राजिम मे गोधुली बेला से ही संतो, महामंडलेश्वरों, साधु, साध्वियों ने भक्तो को आशीर्वचन दिया। रात्रि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शाम बाबी मण्डल रायपुर के भजन, मोना सेन रायपुर के लोकमंच और मुंबई के प्रसिद्ध भजन गायक चरन जीत सिंह के नाम रही।
फागुन मास के कृष्ण पक्ष की यह विजया एकादशी समस्त एकादषी में तीसरे नम्बर की मानी गई है जो मनुष्य जीवन में विजय और सफलता की कामना चाहते हैं, उन्हें एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिये. विशेषकर राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्र के लोगो के लिए इसका बड़ा महत्तव है। इसी महत्व को ध्यान में रखकर आज के पर्व स्नान में देर रात से ही हजारों श्रद्धालु आसपास के ग्रामों से राजिम पहुंचे और अल सुबह ही स्नान कर पुण्य लाभ कमाया। पर्व स्नान को लेकर राजिम-कुंभ प्रशासन ने भी संपूर्ण तैयारियां की थी साधु-संतो के आश्रमों की व्यवस्था तथा मंदिरों में उमडने वाली भीड़ के मददेनजर सुरक्षा प्रबंध भी चाक चौबन्द किए गए थे।
कामधेनु यज्ञ प्रारंभ
संत समागम परिसर में 17 फरवरी से 19 फरवरी तक चलने वाला तीन दिवसीय कामधेनु यज्ञ स्वामी ज्ञान स्वरूपानंद ‘‘अक्रियजी‘‘ के सानिध्य में प्रारंभ हो गया है
यज्ञ की शुरूआत सुबह 9ः15 बजे भव्य जलकलश यात्रा से हुई, जिसमें हजारों की संख्या में साधू-संतगण एवं श्रद्धालुगण शामिल हुए । संगम का जल लाने के लिए संत-समागम परिसर का भ्रमण करते हुए विशाल शोभा यात्रा का आयोजन किया गया था। शोभा यात्रा में परम्पूज्य डाॅ. बिन्दू जी महाराज, परम्हृदय बालयोगी बलराम दास जी, श्री महंत विनोदगिरी जी महाराज, दण्डी स्वामी जी सहित हजारों की संख्या में साधू-संत एवं गणमान्य नागरिक शामिल थे । शोभा यात्रा में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण जनता ने अधिक संख्या में भाग लिया ।
कामधेनु समिति के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल कार्यकारी अध्यक्ष सेन कुमार बोथरा एवं भुनेश्वर साहू ने बताया कि यज्ञ में बैठने वाले यजमान छत्तीसगढ़ के हर जिले से आयेंगें । उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ से 15 जिलों से श्रद्धालुगण सपत्नीक भाग ले रहे हैं । 17 फरवरी को प्रारंभिक यज्ञ में इक्कीस जोड़े भाग लिये, जबकि 18 फरवरी से अंतिम दिन तक इनक्यावन जोड़े यज्ञ में बैठेगें ।
स्वामी ज्ञानस्वरूपानंद अक्रियजी ने कहा कि कामधेनु महायज्ञ भगवान राम के पूर्वज राजा दिलीप ने त्रेता युग में कराया था ।
संत समागम परिसर में 17 फरवरी से 19 फरवरी तक चलने वाला तीन दिवसीय कामधेनु यज्ञ स्वामी ज्ञान स्वरूपानंद ‘‘अक्रियजी‘‘ के सानिध्य में प्रारंभ हो गया है
यज्ञ की शुरूआत सुबह 9ः15 बजे भव्य जलकलश यात्रा से हुई, जिसमें हजारों की संख्या में साधू-संतगण एवं श्रद्धालुगण शामिल हुए । संगम का जल लाने के लिए संत-समागम परिसर का भ्रमण करते हुए विशाल शोभा यात्रा का आयोजन किया गया था। शोभा यात्रा में परम्पूज्य डाॅ. बिन्दू जी महाराज, परम्हृदय बालयोगी बलराम दास जी, श्री महंत विनोदगिरी जी महाराज, दण्डी स्वामी जी सहित हजारों की संख्या में साधू-संत एवं गणमान्य नागरिक शामिल थे । शोभा यात्रा में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण जनता ने अधिक संख्या में भाग लिया ।
कामधेनु समिति के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल कार्यकारी अध्यक्ष सेन कुमार बोथरा एवं भुनेश्वर साहू ने बताया कि यज्ञ में बैठने वाले यजमान छत्तीसगढ़ के हर जिले से आयेंगें । उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ से 15 जिलों से श्रद्धालुगण सपत्नीक भाग ले रहे हैं । 17 फरवरी को प्रारंभिक यज्ञ में इक्कीस जोड़े भाग लिये, जबकि 18 फरवरी से अंतिम दिन तक इनक्यावन जोड़े यज्ञ में बैठेगें ।
स्वामी ज्ञानस्वरूपानंद अक्रियजी ने कहा कि कामधेनु महायज्ञ भगवान राम के पूर्वज राजा दिलीप ने त्रेता युग में कराया था ।
सरस्वती यज्ञ में चार सौ छात्र-छात्राएं शामिल हुयेप्रतिवर्ष महामेरू पीठ के दण्डी स्वामी सच्चिदानंद महाराज द्वारा विभिन्न प्रकार के यज्ञ का आयोजन किया जाता हैं। इस वर्ष भी संत समागम के अवसर पर प्रत्येक दिन अलग-अलग यज्ञ उनके कुंभ स्थल स्थित उनकी कुटियां में संपन्न हो रही हैं। इसी क्रम में 17 फरवरी को सरस्वती यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें कुंभ में पधारें सभी संत-महात्मागण शामिल हुये।
महामेरू पीठ के दण्डी स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने सरस्वती यज्ञ केे उद््देश्यों के बारे में बताया कि भारतीय संस्कृति का अनुकरण बच्चों के माध्यम से होनी चाहिये। यदि सनातन धर्म को बचाना है तोे बच्चों में धर्म का संस्कार डालना ही होता हैं। उन्हेंाने बताया कि प्रतिवर्ष कुंभ के दौरान कक्षा 5वी औंर 8वी मेें प्रथम तीन प्रावीण्यता क्रम प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन धन राशि एवं प्रमाण पत्र उनके द्वारा प्रदान की जाती हैं।
सरस्वती यज्ञ का आयोजन सुबह 9ः00 बजे संत दण्डी स्वामी के सानिध्य में शुरू हुआ, जिसमें विभिन्न स्कूलों के चार सौ बच्चें तथा बड़ी संख्या में साधु-संत व गणमान्य नागरिक शामिल हुये। उन्होंने बताया कि 18 फरवरी को उमावती यज्ञ संपन्न किया जायेगा।
महामेरू पीठ के दण्डी स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने सरस्वती यज्ञ केे उद््देश्यों के बारे में बताया कि भारतीय संस्कृति का अनुकरण बच्चों के माध्यम से होनी चाहिये। यदि सनातन धर्म को बचाना है तोे बच्चों में धर्म का संस्कार डालना ही होता हैं। उन्हेंाने बताया कि प्रतिवर्ष कुंभ के दौरान कक्षा 5वी औंर 8वी मेें प्रथम तीन प्रावीण्यता क्रम प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन धन राशि एवं प्रमाण पत्र उनके द्वारा प्रदान की जाती हैं।
सरस्वती यज्ञ का आयोजन सुबह 9ः00 बजे संत दण्डी स्वामी के सानिध्य में शुरू हुआ, जिसमें विभिन्न स्कूलों के चार सौ बच्चें तथा बड़ी संख्या में साधु-संत व गणमान्य नागरिक शामिल हुये। उन्होंने बताया कि 18 फरवरी को उमावती यज्ञ संपन्न किया जायेगा।
पत्रकारों और उद्योगपतियों भी शामिल हुए
राजधानी रायपुर से प्रसिद्ध उद्योगपति और पत्रकार संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के साथ आज शाम राजिम कुंभ पहुंचे। मुख्य मंच मे श्री अग्रवाल ने सभी का स्वागत स्मृति चिन्ह देकर किया। इसमे प्रमुख रूप से कौशल मिश्रा, रामचंद नचरानी, शंकर पांडे, प्रशांत शर्मा, रामवतार तिवारी, सलमान रवि,राजेश अग्रवाल, अरुण खेतान, सुनील नामदेव, धनवेंद्र जायसवाल, प्रियंका कौशल, विकास शर्मा सहित अनेक पत्रकार और उद्योगपति उपस्थित थे।
आज के आकर्षण
लोमेश पटेल भोथीडिह का जसगीत, लक्ष्मीकांत सेन रायपुर का त्रिव्त बैंड, डी. एन. नंबदूरी खैरागढ़ का तालकचहरी, अश्वनी शर्मा भिलाई का भजन, अमर श्रीवास भिलाई का लोकमंच, दुकालु यादव रायपुर का जगराता, सहित विशेष आकर्षण ‘मर्यादा पुरषोत्तम’ लाईट एंड साउंड का कार्यक्रम होगा।
Thursday, February 16, 2012
राजिम कुम्भ 2012

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